Zindagi ki ashli udaan abhi baaki hai, Mere irado ki imtihan abhi baki hai! Abhi to napi hai mutthi bhar zamin humne, Aage sara aasman abhi baaki hai!!

Thursday, January 12, 2012

उसकी ख्याल आया.............

जब भी लिखना कुछ चाह, सबसे पहले उसकी ही ख्याल आया....
और क्या लिखूं उस पर ?
फिर यही सवाल आया.............

लिखना जब भी चाह कागज पर...........
तो रुक गई कलम वही, जहाँ उसका नाम आया।
सोचा, करू वर्णन उसके रूप का
छा गयी अन्धेरा, चाँद को भी शर्माता पाया॥

लिखना तो आसमान पर भी चाह....
पर लिख सकूँ उसके बारे में, ये सोच आसमां को भी छोटा पाया।
कर देता वर्णन उसके यौवन का ........
पर ढल न जाए, इसलिए इस ख्याल को भी ठुकराया

लिखना तो हवा पर भी चाहा....
पर छोड़ न जाए मुझे, सोच कर दिल सिहर आया......
कर देता वर्णन उसकी मासूमियत का
पर नज़र न लग जाए, हाथ वह भी चल नहीं पाया

मिली थी वो एक अजनबी की तरह
पर उसे हर पल अपने पास पाया

Monday, March 21, 2011

प्यार करो तो ऐसा

आज झंझारपुर बाज़ार के मिलन सीनेमा घर से कोलाहल और तली की गर्गराहट की आवाज आ रही थी, यह शायद इस बात का संकेत था कि सिनेमा अच्छा था आखिर क्यों नहीं इसीलिए तो हमारे गाँव के फौजी साहब भी देखने पहुँच गए है। मैं वहीँ पर फौजी साहब का इंतजार कर रहा था उनसे कर्ज के रूप में कुछ पैसे लेने थे। फौजी साहब जब निकले तो काफी खुश नज़र आ रहे थे। मैंने पूछा क्या बात है सरकार आज आप बड़े खुश नज़र आ रहे है। फौजी बताएं देख भाई अगर कोई प्रेम करे तो इस सिनेमा के तरह। फौजी साहब के इस बात को सुनकर मैं फिर से पूछा ऐसा क्या है इस सिनेमा में तो फौजी साहब बताएं। अरे साल! एक पंडित कि लड़की को किसी दुसरे जाति के लड़का से प्रेम हो गया और बड़े मुश्किल के बाद वो दोनों भागकर शादी कर लिया। भाई मनीश ! कोई प्यार करे तो ऐसा ...........
फिर मैं फौजी साहब को अपने समस्या से परिचित कराया तो वो बोलें, घबरावो नहीं मनीष! चलो मेरा घर वहां सब इंतजाम हो जायेगा। फौजी साहब के घर पहुचते ही उनकी धर्मपत्नी कि सविलाप की आवाज सुनाई दी... फौजी साहब उन्हें संतोष देते हुए विलाप का कारण पूछे तो उनकी पत्नी बताई कि फौजी साहब की लड़की एक यादव के लड़के के साथ घर से भाग गयी, लड़का उस इलाका का एक मात्र सरकारी नौकरी करने वाला था। इस बात को सुनते ही फौजी साहब का हाथ दीवाल पर लटक रही बन्दुक पर पड़ी........ .... मैं मन ही मन सोचा! कोई प्रेम करे तो ऐसा ..........................
यह लेखक मिथला की उद्यागामी लेखक सुश्री केशव कर्ण जी के लेखक के विचार पर लिखित है। उनका लेख प्रत्येक बुधवार इस ब्लॉग पर पढ़े http://manojiofs.blogspot.com

Wednesday, March 16, 2011

इश्क मेरा पथ


ओ इश्क क्या तू,
समंदर तो नहीं?
दर्दों से भरा है तू,
पानी से तो नहीं?

पानी का प्यास,
पानी से बुझाता है!
तेरा प्यास किसी को,
देखने से बुझता हैं!!

कसम तेरा उसको,
वो ना मिली तो,
इस जहाँ में जिंदगी,
मुझे क्या मिली?

ये उसकी हुस्न की,
है जादू जिसे देखा तो
तूझ सा समंदर मिला,
ये मेरी खता तो नहीं!!

ओ इश्क ये बता,
तू समन्दर तो नहीं!

उसके आने पर,
खुशियों से भरा है तू !
जाते ही उसको,
आंसू बहा देता है तू!!

दम घूँट कर दिन,
आंसू बहाकर रात कटता है!
तू मेरा पथ और,
वो मेरी मंजिल तो नहीं!!