आज झंझारपुर बाज़ार के मिलन सीनेमा घर से कोलाहल और तली की गर्गराहट की आवाज आ रही थी, यह शायद इस बात का संकेत था कि सिनेमा अच्छा था आखिर क्यों नहीं इसीलिए तो हमारे गाँव के फौजी साहब भी देखने पहुँच गए है। मैं वहीँ पर फौजी साहब का इंतजार कर रहा था उनसे कर्ज के रूप में कुछ पैसे लेने थे। फौजी साहब जब निकले तो काफी खुश नज़र आ रहे थे। मैंने पूछा क्या बात है सरकार आज आप बड़े खुश नज़र आ रहे है। फौजी बताएं देख भाई अगर कोई प्रेम करे तो इस सिनेमा के तरह। फौजी साहब के इस बात को सुनकर मैं फिर से पूछा ऐसा क्या है इस सिनेमा में तो फौजी साहब बताएं। अरे साल! एक पंडित कि लड़की को किसी दुसरे जाति के लड़का से प्रेम हो गया और बड़े मुश्किल के बाद वो दोनों भागकर शादी कर लिया। भाई मनीश ! कोई प्यार करे तो ऐसा ...........
फिर मैं फौजी साहब को अपने समस्या से परिचित कराया तो वो बोलें, घबरावो नहीं मनीष! चलो मेरा घर वहां सब इंतजाम हो जायेगा। फौजी साहब के घर पहुचते ही उनकी धर्मपत्नी कि सविलाप की आवाज सुनाई दी... फौजी साहब उन्हें संतोष देते हुए विलाप का कारण पूछे तो उनकी पत्नी बताई कि फौजी साहब की लड़की एक यादव के लड़के के साथ घर से भाग गयी, लड़का उस इलाका का एक मात्र सरकारी नौकरी करने वाला था। इस बात को सुनते ही फौजी साहब का हाथ दीवाल पर लटक रही बन्दुक पर पड़ी........ .... मैं मन ही मन सोचा! कोई प्रेम करे तो ऐसा ..........................
यह लेखक मिथला की उद्यागामी लेखक सुश्री केशव कर्ण जी के लेखक के विचार पर लिखित है। उनका लेख प्रत्येक बुधवार इस ब्लॉग पर पढ़े http://manojiofs.blogspot.com
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