ओ इश्क क्या तू,
समंदर तो नहीं?
दर्दों से भरा है तू,
पानी से तो नहीं?
पानी का प्यास,
पानी से बुझाता है!
तेरा प्यास किसी को,
देखने से बुझता हैं!!
कसम तेरा उसको,
वो ना मिली तो,
इस जहाँ में जिंदगी,
मुझे क्या मिली?
ये उसकी हुस्न की,
है जादू जिसे देखा तो
तूझ सा समंदर मिला,
ये मेरी खता तो नहीं!!
ओ इश्क ये बता,
तू समन्दर तो नहीं!
उसके आने पर,
खुशियों से भरा है तू !
जाते ही उसको,
आंसू बहा देता है तू!!
दम घूँट कर दिन,
आंसू बहाकर रात कटता है!
तू मेरा पथ और,
वो मेरी मंजिल तो नहीं!!
बेहतरीन कविता... कथ्य और कथानक दोनों दुरुस्त...शब्दों का चयन भी सुरुचिपूर्ण है ...
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