Zindagi ki ashli udaan abhi baaki hai, Mere irado ki imtihan abhi baki hai! Abhi to napi hai mutthi bhar zamin humne, Aage sara aasman abhi baaki hai!!

Wednesday, March 09, 2011

ग़ज़ल

ज़र्द मौसम को सूर्ख़ फूल हैं हम
हर नज़र को कहाँ क़ुबूल हैं हम

हुमसे हर शख्स रूठ जाता है
क्या करें, साहिबे - उसूल हैं हम

मसनदें हो गयीं अता जिनको
उनकी नज़रों में सिर्फ धुल हैं हम

काश ! हमसे कोई सवाल करे
किसलिये चुप हैं, क्यों मलूल हैं हम

अपनी सब ख़ामियों के साथ जिया
कोई तो है जिसे क़ुबूल हैं हम

No comments:

Post a Comment