एक सप्ताह का शुरुआत सोमवार से होता है, और उसी दिन से मैं सन्डे का इंतजार करता हूँ क्योंकि मुझे सन्डे को कॉलेज जाना होता है। कॉलेज में पढाई की सिलेबस इस तरह बंद है जिसका वर्णन करना उचित नहीं, लेकिन वहां एक सिलेबस की पढाई और प्रैक्टिकल अच्छी होती है, जो मेरा कविता (कोई लड़की नहीं) का शीर्षक बनगया।ऐ इश्क तु ये बता,
कहाँ तेरी जन्म हुई ?
कहाँ पली - बढ़ी और,
कहाँ तु इतनी सूंदर हुई ?
अगर तु आस्तिक है तो,
तुझ में दर्द क्यों ?
नास्तिक है तो, मैं
तुझ पर लुटने को तैयार क्यों ?
कहीं ये मेरी महबूबा की,
हुस्न की अदा तो नहीं।
जिसको सामने पाकर, मैं
तुझ में लीन हुआ॥
ऐ इश्क तु ये बता,
कहाँ तेरी जन्म हुई ?
कहाँ तेरी जन्म हुई ?
तु यादों की दरिया है,
दर्दों की समुंदर।
दर्द की प्यास कभी बुझती नहीं,
मुझ में इतनी प्यास हैं क्यों?
ऐ इश्क तु ये बता,
तुझ पर मरने को "मनीष" तैयार हैं क्यों ?
मणिकांत मिश्र "मनीष"
कविता के भाव अच्छे हैं।
ReplyDeleteवर्तनी की अशुद्धियों पर ध्यान दें।
शुभकामनाएं।