ओ बुधनी की माँ कहाँ भागे जा रही हो.... । आ हा हा .... लाल भाई मै तो आपके पास ही आ रही हूँ। अच्छा बैठिये बताइए कैसे याद किये मुझे ....... । लाल भाई क्या बताऊ आज कल सारा काम तो खुद ही करना पड़ता है ......रेल बन गए है। लाल भाई - क्यों बेटा कहा गया। लाल भाई भगवान यदि बेटा दें तो रमण के बेटा जैसा बिलकुल भगवन राम की तरह पुरुषोत्तम। बोलता है तो ऐसा लगता है कि रफ़ी साहब से बात कर रही हूँ .... और उतना ही नहीं ऐसे - ऐसे शब्द का प्रयोग करते है लगता है ग़ज़ल सुन रही हूँ। अरे बुधनी की माँ जैसा उस लड़का का नाम है वैसा ही निर्मल स्वभाव ......... । ज्ञानी की तरह बात करता है शायद ही कभी गलत शब्द उसके मुख से निकला हो ... । लाल भाई ये बताये की वो लड़का पढता किस क्लास में है। भाभी - वो बी.कॉम सेकंड पार्ट का लड़का है, शायद ही कोई इक्की - दुक्की विभाग छुट गया हो नहीं तो वो हर विभव में अव्वल आया है। उसका जीवन शैली तो एक उद्यागामी पुरुषों की तरह है। आज कल तो वो तरह - तरह के सुचना जुटाने में लगा....... IAS करने का संकल्प लिया है। हर एक सुचना RTI से मंगवाता है। कल उसके घर में एक लेटर देखा था जो देल्ही परिवहन निगम के आर टी आई विभाग से आया था, उसे पढ़कर काफी हंसी आया । मुझे भी तो सुनाइये लाल भाई क्या लिखा था ........ । लिखा था
सदा भवानी बाहिनी सन्नमुख रहे भारती
पांच प्रशासक मिल रक्षा करे पि एम्, सी एम्, डी एम्
उपरोक्त कारण से ही किसी भी बस के बायीं तरफ कुछ सीटें लड़कियों के लिए आरक्षित होती है। वैसे तो वो सिट बस टर्मिनल से चार स्टॉप तक ही वैध होता है, उसके बाद तो लड़की को देखकर लड़का वैसे ही खड़ा हो जाता है, जैसे किसी Cow को देखकर बुल।
भाभी इस चिट्ठी को पढ़कर हमें तो पूरा - पूरा यकीन हो गया की लड़की के लिए कागज पर कुछ और वैसे कुछ और ही आरक्षण है। एक आँख दिखे कहानी आप को बता रहा हूँ.... एक लड़का और एक लड़की को कल सरकारी नौकरी के लिए आवेदन पत्र खरीदते देखा। लड़की - लड़का से कह रही थी, तू एक ही फॉर्म खरीद मुझे दो लेने दे। वैसे भी यार तेरे पास समयt कहाँ और अगर तू दोनों के लिए तयारी करोगे तो मुझे से फ़ोन पर बात कौन करेगा। एसा करती हूँ एक - दूसरा लड़का को अपना मोबाइल नंबर दे देती हूँ। लड़का बोल अरे नहीं यार ....... बोल तो मै ये फॉर्म भी छोड़ दूँ.... ।
भाभी इस चिट्ठी को पढ़कर हमें तो पूरा - पूरा यकीन हो गया की लड़की के लिए कागज पर कुछ और वैसे कुछ और ही आरक्षण है। एक आँख दिखे कहानी आप को बता रहा हूँ.... एक लड़का और एक लड़की को कल सरकारी नौकरी के लिए आवेदन पत्र खरीदते देखा। लड़की - लड़का से कह रही थी, तू एक ही फॉर्म खरीद मुझे दो लेने दे। वैसे भी यार तेरे पास समयt कहाँ और अगर तू दोनों के लिए तयारी करोगे तो मुझे से फ़ोन पर बात कौन करेगा। एसा करती हूँ एक - दूसरा लड़का को अपना मोबाइल नंबर दे देती हूँ। लड़का बोल अरे नहीं यार ....... बोल तो मै ये फॉर्म भी छोड़ दूँ.... ।
अरे नीरज बेटा इधर आओ ..... हमलोग तुम्हारा की चर्चा कर रहे थे। नमस्कार चाचा जी और चची, क्या हुआ चाचा जी मुझसे कोई गलती हो गई क्या - नीरज बोला। नीरज तुम्हारा ये पत्र आया है... ओ चाचा जी मै इसे ही खोज रहा हूँ।
देखिये कितना गन्दा विचार हो गया है आज कल के लड़का का। हम तो कहते है अरे भाई दानव क्यों बन रहे हो, मानव बनो। अर्जुन के तरह पुरुषोत्तम बनो ताकि वासना से वशीभूत अप्सरा तेरे पास आये, तुम क्यों खुद जंगल में जाते हो।
लाल भाई - नीरज ये प्रकृति प्रदात है, क्या भावी हम सही कह रहे है न।
चाचाजी मै भी इस बात को मानता हूँ लेकिन हरेक चीज एक समय पर ही अच्छा होता है। देखिये न लड़की आज कल कितना टैलेंट होते जा रही है।
अब तो केंद्र सरकार को लड़का के लिए आरक्षण घोषित करना होगा, यदि ऐसा चलता रहे तो।
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