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Wednesday, August 18, 2010

Provident Fund

भविष्य निधि (Provident Fund) किसी व्यक्ति के भविष्य में कम आने के लिए बनायीं गयी एक Fund हैं। भविष्य से तात्पर्य है उसके अवकाश ग्रहण करने या मृत्यु के बाद। कर्मचारी अपने वेतन में से प्रतिमाह एक निश्चित राशि का अंशदान करता हैं और नियोक्ता(Employer) भी उसी के बराबर राशि अंशदान करते है। यह राशि सरकारी प्रतिभूतियों(Equty) में लगा दी जाती हैं जिससे ब्याज एक निश्चित राशि अर्जित होती है। कर्मचारी के खाते में शेष राशि पर इस प्रकार अर्जित ब्याज उसके भविष्य निधि खाते में क्रेडिट करदिया जाता हैं। यह राशि प्रतिवर्ष संचित होती हैं। यह सारी संचित राशि कर्मचारी को उसके अवकाश ग्रहण करने या एच्छिक अवकाश ग्रहण करने के समय दे दी जाती है या कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके क़ानूनी वारिस को दे दी जाती है।
भविष्य निधि निम्नलिखित प्रकार के होता है: -
1. Statutory Provident Fund (सांविधिक भविष्य निधि)
2. Recognised Provident Fund (मान्यता प्राप्त भविष्य निधि)
3. Non - recognised Provident Fund (गैर - मान्यता प्राप्त भविष्य निधि)
4. Public Provident Fund (सार्वजनिक भविष्य निधि)
5. Approved Superannuation Fund (अनुमोदित अधिवार्षिकी निधि)
1. Statutory Provident Fund
सांविधिक भविष्य निधि भविष्य निधि अधिनियम 1925 के अंतर्गत स्थापित की जाती है और इसे सरकारी या अर्धसरकारी विभागों के द्वारा रखा जाता है।
2. Recognised Provident Fund
यह भविष्य निधि आयकर आयुक्त द्वारा आयकर अधिनियम 1961 की चौथी अनुसूची के भाग A में दिए गए नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त होती है। इसके अंतर्गत वह भविष्य निधि भी आती है जो कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 के अंतर्गत बनायीं गयी योजना के अंतर्गत स्थापित की गयी हो।
किसी निधि को यदि भविष्य निधि आयुक्त मान्यता दे देता है लेकिन आयकर आयुक्त से मान्यता प्राप्त नहीं होता है तो उस भविष्य निशि में कीये जाने वाले अंशदान पर आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर छुट नहीं मिलाती है।
3. Non - recognised Provident Fund
यह वह भविष्य निधि है जो आयकर आयुक्त से मान्यता प्राप्त नहीं होती है।
यह वह भविष्य निधि है जो न तो सांविधिक भविष्य निधि होता है और न ही मान्यता प्राप्त भविष्य निधि। इसी प्रकार के निधि सामान्यतया निजी नियोक्ताओं द्वारा राखी जाती है।
4. Public Provident Fund
नियमित वेतन भोगी कर्मचारी अपने वेतन में से कटौतियों के द्वारा भविष्य निधि में पैसा डालकर बचत करते है। जनता के हित के लिए, खासतौर से स्वनियोजित व्यक्तियों के लिए केन्द्रीय सरकार ने सार्वजानिक भविष्य निधि योजना शुरू किया। व्यक्ति और व्यक्तियों के संघ अपनी सुविधा के अनुसार सार्वजानिक भविष्य निधि खाते में पैसा जमा कर सकते है। वेतन भोगी कर्मचारी भी नियमित भविष्य निधि के अतिरिक्त इस निधि के द्वारा भी बचत कर सकते है
सार्वजनिक भविष्य निधि खाते स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की किसी भी ब्रांच या इसके द्वारा नियंत्रित बैंकों में या किसी प्रधान डाक घर या राष्ट्रीयकृत बैंकों की विशेष रूप से उल्लेखित शाखाओं में खोले जा सकते हैं।
कोई भी व्यक्ति सार्वजानिक भविष्य निधि में एक वर्ष में कम से कम 500 रुपया तथा अधिक से अधिक 70,000 रुपया का अंशदान कर सकता है। ब्याज प्रत्येक वर्ष के अंत में क्रेडिट कर दिया जाता है लेकिन यह due केवल परिपक्वता पर ही होता हैं। सार्वजानिक भविष्य निधि में संचित राशी, १५ वर्ष के बाद due hoti हैं।
5. Approved Superannuation Fund
यह आयकर आयुक्त द्वारा आयकर अधिनियम की चौथी अनुसूची के बी भाग में दिए गए नियमों के अनुसार अनुमोदित अधिवार्षिकी निधि है। इस निशि का एक मात्र उद्येश कर्मचारिओं के लिए उनके एक निर्दिष्ट आयु के बाद अवकाश ग्रहण करने पर या अवकाश ग्रहण करने से पहले विकलांग हो जाने पर या कर्मचारियों की मृत्यु पर उनकी विधवाओं या आश्रितों के लिए वार्षिकी का प्रावधान करना हैं।
अगले पोस्ट में पढ़िए: - भविष्य निधि के सम्बन्ध में कर व्यवस्था