दोस्तों,
आज हम चन्द्रमा पर पहुँचने के कगार पर खड़े है, इसमें इन महापुरुषों की भूमिका अखंड और अद्वितीय है। इसलिए इस पवन त्योहार पर हमें उन लोगों को अपने - आप को समर्पित करना चाहिए और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर हमें चाँद से भी आगे निकलना है।
भारत की असली पहचान अभी बाकी है,
हमारे इरादों की इम्तिहान अभी बाकी है।
अभी तो भारत बनाई है G20 में ही जगह,
इसे G8 से भी बहुत आगे निकालनी है।।
हमें उन महापुरुषों की क़ुरबानी और बलिदान की सराहना करते हुए, इस सोने की पड़ी कहे जाने वाली भारत को, हीरा की आभूषण से सजी दुल्हन बनाना है। Old is gold, New is Dimond को चित्रारथ करना है। इसके लिए अपने कर्तव्य पर दृढ रहना होगा और यदि क़ुरबानी की जरुरत पड़ी तो वो भी मेरे लिए बहुत कम होगा। यह माह अगस्त हम लोगों के लिए जितना सुखद उतना ही दुखद है सन 1942 में ब्रिटेन सरकार की हुकूमत ने भारत के निहत्थों जनता पर अंधाधुंध गोली चलाई जिसमें 540 से अधिक लोग मारे गए। वे लोग अपनी जान की वाजी खुद की स्वतंत्रता के नहीं बल्कि मेरे स्वतंत्रता के लिए लगाये। उनके द्वारा आव्हान किये गए भारत छोड़ो आन्दोलन के फलस्वरूप ही हमें सन 1947 में 15 अगस्त को हमारे घर स्वतंत्रता की दीया जली। आज भी वो दीया हमें खुद को संकल्प लेने और आपको पैगाम देने को कहता है - भारत भूमि की विकास को दुनिया की देशों की श्रेणी में चोटी पर अंकित करेंगे। आज 15 अगस्त 2010 को इस पोस्ट के माध्यम से हम खुद को और आपको संकल्प लेने के लिए आमंत्रित करता हूँ की आज भी भारत के कई समस्या है जिसको सुलझाना भारत के हरके नागरिक का कर्तव्य है। नागरिकों की इस श्रेणी में आगे आईये।